हमारा परिचय
इतिहास
स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर, जो, इंदौर बैंक के नाम से लोकप्रिय है, मूलत: बैंक ऑफ़ इंदौर लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी. इस बैंक की स्थापना महाराज तुकोजीराव होलकर तृतीय ने की थी जो उस समय इस क्षेत्र के तात्कालिक शासक हुआ करते थे.
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के उपशाखा एक्ट के तहत बैंक ऑफ़ इंदौर लिमिटेड १ जनवरी १९६० को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की उपशाखा बनी और इसका नाम परिवर्तित कर स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर किया गया.
बैंक ने १९६२ में थे बैंक ऑफ़ देवास लिमिटेड तथा १९६५ में थे देवास सीनियर बैंक लिमिटेड का व्यवसाय अधिग्रहण कर "ऐ" श्रेणी का दर्जा प्राप्त किया. तब से निरंतर और स्थिर उन्नति करते हुए सन २००८-२००९ में बैंक का व्यवसाय ५०००० करोड़ का आंकडा पार कर चुका है.
दर्शन-अभिव्यक्ति
गुणवत्तापूर्ण आस्तिया तथा सतत लाभप्रदता के माध्यम से अत्याधिक चुनौतीपूर्ण एवं प्रौधोगिकीय निपुणता के कार्य-वातावरण में ग्राहक संतोष में बढोतरी तथा हिताधारियों के हितों के मूल्य में उच्चतम वृद्धि के लिए व्यवसायिकता, दक्षता एवं मूल्यों के कड़े मापदंड स्थापित करते हुए राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्था के रूप में अपनी भूमीका का निर्वाह करते रहना.
संघीय उद्देश्य
राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में मध्य प्रदेश की सर्वोत्तम बैंक के रूप में रहते हुए संघीय विकास की दिशा में नई तकनीको के माध्यम से निरंतर प्रगतिशील रहना.
अंतर्राष्ट्रीय पैमाने पर गुणवत्ता के आधार पर एक स्वस्थ और उत्तम बैंक के रूप में उभरना जिसका उद्देश्य सामाजिक तथा राष्ट्रीय हो.
स्टेट बैंक समूह में एक सशक्त माध्यम के रूप में अपनी छवि बनाना.
ग्राहक सेवा को विकासशील तथा उन्नत आयाम प्रदान करना.